2500 रुपए से शुरू कर 3,250 करोड़ के टर्नओवर वाली रिटेल चेन बनाई

वेदिका चौबे Vol 1 Issue 28 मुंबई 07-Jul-2018

लोग उन्हें पागल, घुमक्‍कड़ कहते थे, जो बहुत बार बड़े जोखिम ले लेता था. कई लोगों ने उन्हें खारिज कर दिया लेकिन नानू गुप्ता हमेशा भारतीय बाज़ार की नब्‍ज़ पहचान कर आगे बढ़ते रहे.

आज उनकी उम्र 75 साल है और वो एक बड़े बिज़नेस साम्राज्य इलेक्‍ट्रॉनिक रिटेल चेन विजय सेल्स के प्रमुख हैं. इस चेन के पूरे भारत में 76 स्टोर हैं.

वित्‍तीय वर्ष 2016-17 में इस पार्टनरशिप फ़र्म का टर्नओवर 3,250 करोड़ रुपए रहा और साल 2017-18 में यह 3,700 करोड़ का आंकड़ा पार कर गया.

नानू गुप्‍ता ने पहला रिटेल आउटलेट माटुंगा में खोला. वहां सिलाई मशीन और पंखे बेचे जाते थे. चित्र में दोनों बेटों निलेश और आशीष के साथ नानू गुप्‍ता. बिज़नेस अब उनके दोनों बेटे संभाल रहे हैं. (फ़ोटो: विशेष व्‍यवस्‍था से)


साल 1967 में नानू गुप्‍ता का उद्यमी सफर मात्र 2,500 रुपए से शुरू हुआ था.

हरियाणा के कैथल गांव के एक किसान परिवार में सन् 1936 में उनका जन्म हुआ. जब वो 18 साल के थे, तभी काम की तलाश में उन्होंने अपना गांव छोड़ दिया.

वो बताते हैं, मैं साल 1954 में मुंबई आया और वाल्केश्वर में कज़िन के यहां रहा. वो उषा सिलाई मशीन और पंखों के डिस्ट्रिब्यूटर थे. मैंने कुछ साल उनके साथ बतौर सेल्समैन काम किया.

एक दशक बाद नानू ने माटुंगा में भाई विजय के साथ ख़ुद की दुकान शुरू की और सिलाई मशीन व पंखे बेचने लगे. विजय का साल 1980 में निधन हो गया.

नानू अपने भाई के बहुत चहेते थे, इसलिए उन्होंने दुकान का नाम विजय सेल्स रखा.

50-60 वर्ग फ़ुट की यह दुकान बहुत छोटी थी और किराया 30 रुपए महीना था, लेकिन उनके सपने बड़े थे.

नानू बताते हैं दुकान शुरू करते समय मेरे पास मात्र 2,500 रुपए थे, लेकिन मुझे ख़ुद पर और भगवान पर पूरा भरोसा था. इसलिए मैंने सिर्फ़ अपने काम पर ध्‍यान केंद्रित किया.

उन्होंने सिलाई मशीनें, पंखे और ट्रांजिस्टर बेचने से शुरुआत की थी. साल 1972 में ब्‍लैक एंड व्हाइट टीवी भी बेचने लगे. साल 1975 तक नानू ने माहिम में एक दुकान ख़रीद ली और अगले ही साल कंपनी रजिस्टर करवा ली.

साल 1982 में जब भारत में रंगीन टीवी आया, तो बाज़ार में उसकी मांग में तेज़ी आई. नानू के लिए यह महत्वपूर्ण समय था. अधिक प्रॉडक्‍ट रखने के लिए दुकान में अधिक जगह की दरकार थी.

बड़े स्‍टोर खोलने के प्रति नानू का झुकाव उद्योग पर नज़र रखने वालों को हमेशा आश्‍चर्य में डालता रहा.


नानू कहते हैं, इंडस्ट्री का चेहरा बदल चुका था और कलर टीवी की बिक्री बढ़ चुकी थी. ओनिडा, बीपीएल, वीडियोकॉन जैसे ब्रैंड कलर टीवी के अलावा वॉशिंग मशीन, एसी बाज़ार में ला रहे थे.

साल 1986 में विजय सेल्स ने 600 वर्ग फ़ुट जगह में बांद्रा में विजय सेल्स की पहली ब्रांच खोली.

नानू गुप्ता के बड़े बेटे और विजय सेल्स के मैनेजिंग डायरेक्टर निलेश गुप्ता कहते हैं, उस वक्त कुछ ही ब्रैंड्स थे और ऐसे बड़े स्टोर की ज़रूरत नहीं थी, लेकिन मेरे पिता ने सोचा कि प्रॉडक्ट्स दिखाने के लिए बड़ी दुकान होनी चाहिए.

साल 1994 तक दो बड़े स्टोर खुल चुके थे. पहला स्टोर 700 वर्ग फ़ुट का शिवाजी पार्क में तो दूसरा 1,500 वर्ग फ़ुट का सायन में.

सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन जब 1993-94 में सैमसंग, एलजी व डेवू जैसी कंपनियां भारत आईं और उन्होंने बड़े फ़्रिज-टीवी बेचने शुरू किए, तो उन्हें रखने के लिए बड़ी जगह की ज़रूरत पड़ने लगी.

निलेश कहते हैं, हमने माहिम में अपने पहले स्टोर के बग़ल में 2500 वर्ग फ़ुट की बड़ी दुकान ख़रीदी. हमें आश्चर्य हुआ कि जब भी हमने जगह बढ़ाई, हमारी बिक्री में इजाफ़ा हुआ.

मुंबई में विजय सेल्स ही ख़रीदारों के लिए पहली बार डिस्प्ले कॉन्‍सेप्‍ट लेकर आई. बिक्री बढ़ी और साल 2006-07 तक मुंबई में विजय सेल्स के 8-10 स्टोर हो गए.

पिछले दशक में मुंबई में जब बड़े आकार के रिटेल स्‍टोर खुले, तब भी नानू विचलित नहीं हुए.


इसके बाद नानू गुप्‍ता ने गोरेगांव में सबसे बड़ा स्टोर ख़रीदा. वहां चार फ़्लोर थे और हर फ़्लोर 1,300 वर्ग फ़ुट का था.

नानू कहते हैं, जब हमने गोरेगांव स्टोर ख़रीदा, इंडस्ट्री ने कहा कि विजय सेल्स के लोग पागल हो गए हैं. उन्हें चिंता थी कि हम बड़े स्टोर पर बहुत पैसा ख़र्च कर रहे थे लेकिन अब वो स्टोर भी छोटे पड़ रहे थे.

परेशानी साल 2007 में आई जब क्रोमा, रिलायंस और फ़्यूचर ग्रुप के शोरूम्स खुले. तब तक मुंबई में विजय सेल्स के 14 स्टोर खुल चुके थे.

निलेश कहते हैं, हमें आश्चर्य हुआ, जब हमारे पास ब्रैंड को बेचने के प्रस्ताव आने लगे. सभी को लगा कि बड़ी कंपनियों के आने के बाद विजय सेल्स बंद हो जाएगा. मैं भी परेशान था. लंच और डिनर पर भाइयों और पिता के बीच इसी विषय पर बात होती.

लेकिन नानू पर कोई असर नहीं पड़ा.

नानू कहते हैं, मैंने उससे कहा कि हमें डरने की ज़रूरत नहीं. अगर हम कड़ी मेहनत करें और अपने ग्राहकों का ख्‍़याल रखें तो सब कुछ ठीक होगा.

निलेश कहते हैं कि उस दिन से उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वियों के बारे में नहीं सोचा.

नानू ने कुछ समय जिम के उपकरण भी बेचे, लेकिन मांग में कमी के चलते बिक्री बंद करना पड़ी.


दरअसल, उनका असली विकास 2007 के बाद शुरू हुआ. उन्होंने पुणे, सूरत, दिल्ली और अहमदाबाद में भी स्टोर खोले.

निलेश बताते हैं, साल 2007 से पहले हम डिजिटल प्रोडक्ट्स नहीं बेचते थे. लेकिन बाज़ार बदल रहा था और विजय सेल्स ने मोबाइल फ़ोन, लैपटॉप बेचने शुरू किए. अब हम सभी इलेक्ट्रॉनिक सामान बेचते हैं.

साल 2000 में विजय सेल्स का टर्नओवर 100 करोड़ रुपए था, जो 2008 में बढ़कर क़रीब 500 करोड़ तक पहुंच गया.

जब साल 2000 में मुंबई के ओपेरा हाउस में स्टोर शुरू हुआ तो इलेक्ट्रॉनिक्स बाज़ार में विजय सेल्स जाना-माना नाम बन गया.

निलेश कहते हैं, इतने सालों बाद भी मैंने अपने पिता को कभी काम से थकते नहीं देखा. वो हमेशा अपने ग्राहकों का ख़्याल रखते हैं. उनकी उम्र 75 साल है लेकिन बिज़नेस पर उनका पूरा नियंत्रण है. अगर कोई ग्राहक रात नौ बजे भी आ जाता है और पूछता है, ‘‘क्या आप दुकान बंद कर रहे हैं,’’ तो मेरे पिता कहते हैं, नहीं तो, और वो ग्राहक का दुकान में स्वागत करने लगते हैं.

ईएमआई सुविधा आने के पहले ही नानू ने ग्राहकों को किस्‍तों में भुगतान की सुविधा मुहैया कराई. इससे उन्हें हज़ारों ग्राहकों का विश्वास हासिल हुआ. कुछ महीने पहले पुणे का एक ग्राहक नानू गुप्‍ता से मिलने आया क्योंकि वो बचपन से विजय सेल्स से इलेक्ट्रॉनिक्स का सामान ख़रीद रहा था.

नानू बताते हैं, एक बार एक पुराने ग्राहक प्रभादेवी ब्रांच आए और कहा कि उनके पिता विजय सेल्स से सामान ख़रीदते थे और अब वो अपनी पोती को यहां से मोबाइल ख़रीद कर भेंट कर रहे हैं.

मुंबई से बाहर विजय सेल्‍स के स्‍टोर दिल्‍ली एनसीआर, पुणे, अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा में हैं.


इस कहानी से विजय सेल्स के कर्मचारी इतने प्रेरित हुए कि उन्होंने विज्ञापन टीम के साथ इसे शेयर किया और इस पर एक टीवी विज्ञापन बनाया गया.

मात्र दसवीं तक पढ़े नानू कहते हैं, मेरा विश्वास है कि काम ही पूजा है. मैं खाली नहीं बैठ सकता.

आज भारत के विभिन्न शहरों में विजय सेल्स के 76 स्टोर हैं. कंपनी हर साल तीन से चार स्टोर खोलने की कोशिश करती है.

निलेश बताते हैं, हमने जिम का सामान बेचने की कोशिश की, लेकिन कम मांग के कारण उसे बंद करना पड़ा. तबसे हम सिर्फ़ इलेक्ट्रॉनिक्स सामान बेचते हैं.

तीन साल पहले नानू की पत्नी की मृत्यु हो गई. वो अपने दो बेटों निलेश और आशीष के साथ सांताक्रूज़ में रहते हैं. दोनों बेटों की शादी हो गई है.

विजय सेल्स ने दो कर्मचारियों के साथ शुरुआत की थी. आज पूरे भारत में इसके 1900 से ज़्यादा कर्मचारी हैं.

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